मोबाइल और टैबलेट आज बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया के कारण बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा फोन देखने की आदत बच्चों की हार्ट हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने से बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। दौड़ना-भागना और आउटडोर खेल लगभग बंद हो जाते हैं, जिससे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं कम उम्र में ही शुरू हो सकती हैं। ये सभी फैक्टर भविष्य में हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, ज्यादा फोन इस्तेमाल करने से बच्चों की नींद भी प्रभावित होती है। देर रात तक मोबाइल देखने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नींद की कमी और तनाव हार्ट से जुड़ी बीमारियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ बच्चों में जंक फूड और मीठे ड्रिंक्स का सेवन भी बढ़ रहा है। मोबाइल देखते समय अनहेल्दी स्नैकिंग मोटापे को बढ़ाती है, जो हार्ट के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना जाता है। कम उम्र में गलत लाइफस्टाइल अपनाने से आगे चलकर गंभीर हृदय रोग हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और उन्हें फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित करें। रोजाना कम से कम एक घंटा आउटडोर खेल, साइकिलिंग या एक्सरसाइज करना बच्चों के दिल को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकता है। साथ ही, संतुलित आहार, समय पर सोना और मोबाइल से ब्रेक लेना बेहद जरूरी है।
हालांकि डॉक्टर यह भी कहते हैं कि मोबाइल का पूरी तरह से इस्तेमाल बंद करना संभव नहीं है, लेकिन इसका संतुलित उपयोग जरूरी है। अगर बच्चों में सांस फूलना, जल्दी थकान, मोटापा या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, जरूरत से ज्यादा फोन देखना बच्चों के दिल की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। सही आदतें, सीमित स्क्रीन टाइम और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाकर बच्चों को हार्ट की बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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