ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और वे कमजोर होकर आसानी से टूट सकती हैं। अक्सर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन समय रहते पहचान और रोकथाम से हड्डियों को बचाया जा सकता है।
ऑस्टियोपोरोसिस में सबसे प्रभावित हड्डियां
ऑस्टियोपोरोसिस शरीर की सभी हड्डियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन तीन हड्डियां सबसे जल्दी और ज्यादा प्रभावित होती हैं:
- कलाई की हड्डियां (Wrist Bones / Radius)
- अक्सर सबसे पहले टूटती हैं, खासकर छोटी गिरावट या अचानक झटका आने पर।
- शुरुआती संकेत: हल्की दर्द, सूजन या पकड़ में कमजोरी।
- कमर की रीढ़ की हड्डियां (Spine / Vertebrae)
- रीढ़ की हड्डियों का खोखलापन धीरे-धीरे होता है और शुरुआती दौर में यह दर्द या कर्कश महसूस नहीं कराता।
- संकेत: धीरे-धीरे ऊँचाई कम होना, पीठ में दर्द, झुकाव बढ़ना।
- हिप की हड्डियां (Hip / Femur)
- गिरने या चोट लगने पर हिप फ्रैक्चर आम है।
- यह सबसे गंभीर नुकसान वाली हड्डी है क्योंकि टूटने पर लंबी रिकवरी और चलने-फिरने में कठिनाई होती है।
ऑस्टियोपोरोसिस क्यों होता है?
- उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों में कैल्शियम और मिनरल की कमी
- महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- विटामिन D और कैल्शियम की कमी
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण
- पीठ और कमर में हल्का या लगातार दर्द
- गिरने या हल्की चोट में हड्डियों का टूटना
- ऊँचाई में कमी
- शरीर में झुकाव या मुद्रा में बदलाव
बचाव और रोकथाम
- कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार
- दूध, पनीर, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडा, मछली
- फिजिकल एक्टिविटी और वर्कआउट
- वॉकिंग, जॉगिंग, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
- सनलाइट में समय बिताएं
- शरीर को विटामिन D बनाने में मदद मिलती है
- एल्कोहल और स्मोकिंग से बचें
- हड्डियों की कमजोरी को बढ़ाते हैं
- डॉक्टर से समय-समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट
- शुरुआती पहचान के लिए जरूरी
ऑस्टियोपोरोसिस केवल उम्र बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि हड्डियों की सुरक्षा और सही लाइफस्टाइल से इसे रोकना संभव है। खास ध्यान दें कि कलाई, रीढ़ और हिप की हड्डियां सबसे पहले कमजोर होती हैं। सही आहार, एक्सरसाइज और नियमित जांच से हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है।
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