ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड** के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CIO एस. नरेन ने 2025 को भारतीय इक्विटी के लिए “सुस्ती का साल” बताया, इसके बावजूद कि मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल मजबूत थे, जिसमें कम राजकोषीय/चालू खाता घाटा, नियंत्रित महंगाई और अच्छी ग्रोथ शामिल है। FII आउटफ्लो और कमजोर रुपये (USD के मुकाबले ~5% गिरावट) के बीच बाजारों ने मामूली सिंगल-डिजिट रिटर्न (~9–10% निफ्टी के लिए) दिया, जो कई ग्लोबल साथियों से कम रहा।
2026 का आउटलुक: आगे रिलेटिव मजबूती
नरेन को 2026 में बदलाव की उम्मीद है, जिसमें **भारतीय बाजार** ज्यादातर ग्लोबल बाजारों से **बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं**। मुख्य सपोर्ट:
– अगले दशक में भारत की सबसे मजबूत लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी, जो अनुकूल डेमोग्राफिक्स और आर्थिक क्षमता से प्रेरित है।
– 2025 के खराब प्रदर्शन के बाद बेहतर रिलेटिव वैल्यूएशन।
– संभावित ग्लोबल करेक्शन (जैसे, ओवरवैल्यूड US टेक स्टॉक) जो भारत के लिए अवसर पैदा करेंगे।
वह 2025 की शुरुआत की तुलना में थोड़ा अधिक इक्विटी एलोकेशन का सुझाव देते हैं, मौजूदा स्तरों को एक मापा-जोखिम वाला एंट्री पॉइंट मानते हुए।
कीमती धातुओं पर सावधानी
सोने और चांदी ने 2025 के रिटर्न पर हावी रहे (~सोने के लिए 65–70%; चांदी के लिए 140–148%), जिससे वैल्यूएशन बढ़ गया और उत्साह के संकेत मिले। नरेन नए निवेश में संयम बरतने की सलाह देते हैं।
व्यापक जोखिम और सलाह
ग्लोबल अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, जिसमें ओवरवैल्यूड इंटरनेशनल मार्केट शामिल हैं। नरेन शॉर्ट-टर्म के पीछे भागने के बजाय अनुशासित एसेट एलोकेशन पर जोर देते हैं, जिसमें ग्रोथ को रिस्क मैनेजमेंट के साथ मिलाया जाए।
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