अगर आपको पूरे शरीर में लगातार खुजली, पेशाब करते समय जलन, बार-बार थकान या सूजन जैसी समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो इसे हल्के में न लें। ये लक्षण किडनी में क्रिएटिनिन लेवल बढ़ने की ओर इशारा कर सकते हैं। क्रिएटिनिन एक अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे किडनी फिल्टर करके शरीर से बाहर निकालती है। जब किडनी सही से काम नहीं कर पाती, तो इसका स्तर खून में बढ़ने लगता है और शरीर पर गंभीर असर दिखने लगता है।
क्रिएटिनिन क्या है और क्यों बढ़ता है?
क्रिएटिनिन मांसपेशियों के मेटाबॉलिज्म से बनने वाला वेस्ट प्रोडक्ट है। सामान्य स्थिति में किडनी इसे यूरिन के जरिए बाहर निकाल देती है।
लेकिन किडनी फंक्शन कमजोर होने, डिहाइड्रेशन, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा प्रोटीन डाइट या कुछ दवाओं के कारण क्रिएटिनिन लेवल बढ़ सकता है।
बढ़े हुए क्रिएटिनिन के गंभीर लक्षण
किडनी में समस्या बढ़ने पर शरीर में कई तरह के संकेत दिखने लगते हैं, जैसे:
- पूरे शरीर या त्वचा में तेज खुजली
- पेशाब करते समय जलन या दर्द
- पेशाब का रंग गहरा होना या झाग आना
- पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन
- लगातार थकान और कमजोरी
- मतली, उल्टी या भूख न लगना
- सांस लेने में दिक्कत (गंभीर मामलों में)
खुजली और पेशाब में जलन क्यों होती है?
जब किडनी ठीक से टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल पाती, तो ये अपशिष्ट पदार्थ खून में जमा होने लगते हैं। इसका असर त्वचा और यूरिनरी सिस्टम पर पड़ता है, जिससे खुजली और पेशाब में जलन जैसी समस्याएं होती हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
कुछ लोगों में किडनी से जुड़ी समस्याओं का जोखिम ज्यादा होता है:
- डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज
- लंबे समय तक पेनकिलर लेने वाले
- कम पानी पीने वाले लोग
- ज्यादा नमक और प्रोटीन लेने वाले
- बुजुर्ग और मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
कब करानी चाहिए जांच?
अगर ऊपर बताए गए लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो देर न करें। सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट, यूरिन टेस्ट और GFR टेस्ट के जरिए किडनी की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
- नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें
- ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें
- नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहें
पूरे शरीर में खुजली और पेशाब में जलन केवल मामूली समस्या नहीं, बल्कि किडनी में बढ़े क्रिएटिनिन का शुरुआती संकेत हो सकती है। समय रहते जांच और सही इलाज से गंभीर किडनी रोग से बचा जा सकता है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
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