यदि फैटी लिवर की समस्या बढ़ रही है, तो खानपान में छोटे बदलाव भी बड़ा असर दिखा सकते हैं। हाल ही में एक खास आटे की चर्चा खूब हो रही है, जो लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद कर सकता है। यह आटा है जौ (Barley) का आटा, जिसे वैज्ञानिक रूप से लिवर हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। इसकी फाइबर रिच संरचना और बीटा-ग्लूकैन जैसे तत्व लिवर से फैट घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जौ के आटे का लिवर पर जादुई असर कैसे होता है?
- बीटा-ग्लूकैन लिवर से फैट हटाने में मददगार
जौ के आटे में मौजूद बीटा-ग्लूकैन लिवर में जमा ट्राइग्लिसराइड और LDL को कम करने में मदद करता है। यह फैट को बाइंड कर शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है। - इंसुलिन रेसिस्टेंस कम करता है
फैटी लिवर का बड़ा कारण बढ़ता ब्लड शुगर और इंसुलिन रेसिस्टेंस है। जौ का आटा ग्लूकोज कंट्रोल में मदद करता है, जिससे लिवर पर अतिरिक्त फैट जमा नहीं होता। - डाइजेशन सुधारकर लिवर का बोझ हल्का करता है
हाई फाइबर डाइजेशन को तेज करता है और टॉक्सिन्स को निकालने में मदद करता है। इससे लिवर को खुद को रिपेयर करने का मौका मिलता है। - कोलेस्ट्रॉल कम करने में कारगर
जौ का आटा खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करता है, जो लिवर में फैट जमने का एक बड़ा कारण है।
फैटी लिवर में जौ का आटा कैसे खाएं?
जौ की रोटी – गेहूं के आटे में 30–40% जौ मिलाकर रोटी खाएं।
जौ का दलिया – सुबह नाश्ते में वेजिटेबल दलिया बेहतरीन विकल्प है।
जौ का घोल (Sattu जैसी प्यास छोड़ने वाली ड्रिंक) – गर्मियों में या भोजन के साथ।
जौ-ओट्स का मिश्रण – और भी ज्यादा फाइबर और लिवर क्लीनिंग इफेक्ट।
दिन में कितना लें?
फैटी लिवर वाले मरीज 30–40 ग्राम जौ का आटा रोजाना अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। यदि शुगर के मरीज हैं, तो यह और भी फायदेमंद है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
लो BP वाले
बार-बार पेट फूलने की समस्या वाले
ग्लूटेन सेंसिटिव लोगों के लिए जौ उपयुक्त नहीं
जौ का आटा लिवर में जमा फैट को घटाने, डाइजेशन सुधारने और इंसुलिन रेसिस्टेंस कम करने में बेहद असरदार है। फैटी लिवर के मरीज यदि इसे नियमित रूप से अपने आहार में शामिल करें, तो कुछ ही हफ्तों में लिवर हेल्थ में सुधार देखा जा सकता है।
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