फिल्म ‘एक चतुर नार’ की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री और निर्देशक दिव्या खोसला वर्मा को एक ऐसा अनुभव हुआ, जिसे सुनकर कई लोग हैरान रह गए। शूटिंग के लिए जब वे झोपड़पट्टी के इलाके में गईं, तो उनके सिर में जूं पड़ गई। इस घटना ने उन्हें न केवल असहज किया, बल्कि उस इलाके के कठोर जीवन की झलक भी दिखाई।
दिव्या ने हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि झोपड़पट्टी की सच्चाई उनके लिए बहुत चौंकाने वाली थी। उन्होंने कहा, “शूटिंग के दौरान जब मैं वहां गई, तो उस गंदी और तंग झोपड़पट्टी की बदबू और वहां की हालत देखकर मैं दंग रह गई।”
उन्होंने आगे बताया कि उस जगह साफ-सफाई का बहुत अभाव था, और वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी बेहद मुश्किल थी। “मेरा सिर भी जूं से प्रभावित हो गया था, जो उस इलाके की सच्चाई का एक छोटा हिस्सा था,” दिव्या ने कहा।
झोपड़पट्टी का दर्दनाक सच
दिव्या ने बताया कि वह पहले कभी इतनी बदतर स्थिति वाली जगह पर शूटिंग नहीं कर चुकी थीं। “यह अनुभव मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। वहां की धूल, गंदगी और बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। लेकिन इस कहानी को पर्दे पर लाना बेहद जरूरी था, ताकि लोग इन मुद्दों पर सोचें।”
शूटिंग के दौरान दिव्या ने स्थानीय लोगों के संघर्ष और जीवनशैली को करीब से देखा। उनके अनुसार, झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों की जिंदगी संघर्षों से भरी हुई है, जो अक्सर अनदेखी रह जाती है।
दिव्या की जिम्मेदारी और संदेश
फिल्म के जरिए दिव्या खोसला वर्मा ने समाज के इस दर्दनाक पहलू को सामने लाने की कोशिश की है। उनका मानना है कि कलाकारों को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करना चाहिए।
दिव्या ने कहा, “हमें यह समझना होगा कि ये लोग भी हमारे समाज का हिस्सा हैं और उनकी समस्याओं को समझना जरूरी है। मेरा अनुभव मेरे लिए आंखें खोलने जैसा था।”
फिल्म ‘एक चतुर नार’ की शूटिंग के दौरान हुई ये घटना दिव्या के लिए सिर्फ एक चुनौती नहीं, बल्कि एक सीख भी थी। उन्होंने दर्शकों से अपील की है कि वे समाज के हर तबके के प्रति संवेदनशील रहें और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाएं।
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