भारत में पारंपरिक मीठे विकल्पों की बात हो तो गुड़ (Jaggery) का नाम सबसे पहले आता है। खासकर सर्दियों में गुड़ की लज्जत और इसके स्वास्थ्य लाभों की चर्चा आम है। लेकिन जब बात डायबिटीज यानी मधुमेह की हो, तो सवाल उठता है — क्या डायबिटीज के मरीज गुड़ खा सकते हैं? क्या यह शुगर का स्वस्थ विकल्प है?
इस सवाल को लेकर आम लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। कई लोग मानते हैं कि गुड़ प्राकृतिक होता है इसलिए यह सुरक्षित है, जबकि कुछ इसे सामान्य चीनी (Refined Sugar) जितना ही खतरनाक मानते हैं।
इस रिपोर्ट में जानते हैं डायबिटीज के लिए गुड़ कितना सही या गलत है और विशेषज्ञ इस पर क्या राय रखते हैं।
गुड़: पोषण से भरपूर लेकिन मीठा ही होता है
गुड़ गन्ने के रस या खजूर के रस से बनाया जाता है और इसमें आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन में भी मदद करता है। परंतु इसमें शर्करा की मात्रा अभी भी अधिक होती है।
100 ग्राम गुड़ में करीब 85 ग्राम चीनी (sucrose) पाई जाती है। यानी यह भी ग्लूकोज लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे सामान्य चीनी करती है।
डॉक्टरों की राय: डायबिटीज में गुड़ सुरक्षित नहीं
एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार:
“गुड़ भले ही प्रोसेस्ड शुगर की तुलना में थोड़ा बेहतर हो, लेकिन यह भी ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है। डायबिटीज मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए, खासकर यदि शुगर अनियंत्रित हो।”
फायदे (यदि आप डायबिटीज से पीड़ित नहीं हैं):
आयरन का अच्छा स्रोत – खून की कमी से लड़ने में सहायक
पाचन में सहायक – भोजन के बाद गुड़ खाना गैस और अपच से राहत देता है
इम्युनिटी बढ़ाता है – एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
शरीर को गर्म रखता है – खासकर सर्दियों में अत्यंत उपयोगी
नुकसान (डायबिटीज रोगियों के लिए):
ब्लड शुगर बढ़ा सकता है
इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ा सकता है
ओवरईटिंग की संभावना – मीठा स्वाद अक्सर अधिक मात्रा में खाने को प्रेरित करता है
वजन बढ़ा सकता है, जिससे डायबिटीज की स्थिति और खराब हो सकती है
क्या करें डायबिटीज मरीज?
यदि शुगर नियंत्रण में है, तो डॉक्टर की सलाह से कभी-कभार बहुत ही सीमित मात्रा में गुड़ लिया जा सकता है।
बेहतर विकल्प हैं — स्टेविया, शुगर-फ्री हर्बल स्वीटनर, या फल।
कोई भी मीठा सेवन करने से पहले ब्लड शुगर लेवल की जांच ज़रूर करें।
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