ब्रेस्ट कैंसर के ये शुरुआती संकेत न करें नजरअंदाज, समय रहते पहचानें और इलाज कराएं

ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसरों में से एक बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं। भारत में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि ब्रेस्ट कैंसर के कौन-कौन से शुरुआती लक्षण होते हैं, किन बातों को गंभीरता से लेना चाहिए, और क्या है इसका इलाज।

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण

सीने में गांठ (Lump):
स्तन में कोई कठोर गांठ महसूस होना ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम लक्षण माना जाता है। यह गांठ अक्सर दर्दरहित होती है और धीरे-धीरे बढ़ सकती है।

स्तन का आकार या रंग बदलना:
अगर स्तन का आकार, बनावट या रंग सामान्य से अलग दिखने लगे, तो यह संकेत हो सकता है। स्किन पर झुर्रियां या सिकुड़न जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

निप्पल में बदलाव:
निप्पल का अंदर की ओर मुड़ जाना, उसका आकार बदलना या उसमें से किसी तरह का स्राव (खून या पीला द्रव) होना चिंताजनक हो सकता है।

बगल में सूजन या गांठ:
बगल में लिम्फ नोड्स की सूजन या कठोरता भी कैंसर का संकेत हो सकती है, क्योंकि ब्रेस्ट टिश्यू और लिम्फ सिस्टम आपस में जुड़े होते हैं।

स्तन में लगातार दर्द:
मासिक धर्म से अलग समय पर यदि स्तन में लगातार दर्द बना रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें।

कैसे होता है निदान?

मैमोग्राफी:
ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए सबसे प्रभावी तरीका है। 40 वर्ष की उम्र के बाद हर महिला को नियमित जांच की सलाह दी जाती है।

अल्ट्रासाउंड और बायोप्सी:
गांठ की प्रकृति की पुष्टि के लिए ये टेस्ट किए जाते हैं।

MRI और CT स्कैन:
गंभीर मामलों में कैंसर के फैलाव की जांच के लिए।

इलाज के विकल्प

सर्जरी (Operation):
कैंसर ग्रस्त हिस्से को हटाने के लिए।

Lumpectomy: सिर्फ गांठ हटाई जाती है।

Mastectomy: पूरा स्तन हटाया जाता है।

कीमोथेरेपी:
कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल।

रेडियोथेरेपी:
विकिरण से कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाता है।

हार्मोन थेरेपी और टारगेटेड थेरेपी:
खासतौर पर उन मामलों में जब कैंसर हार्मोन-संवेदनशील हो।

रोकथाम और जागरूकता ही है सुरक्षा की कुंजी

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है —

समय-समय पर स्वयं परीक्षण (Self-examination)

नियमित मैमोग्राफी जांच

संतुलित आहार और व्यायाम

परिवार में कैंसर का इतिहास हो तो विशेष सतर्कता

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