पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। शुरुआती अवस्था में इस बीमारी के लक्षण आसानी से नजर नहीं आते, लेकिन कुछ खास संकेत पेशाब में देखने को मिलते हैं जो इस कैंसर की तरफ इशारा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया गया तो बीमारी बढ़ सकती है और इलाज मुश्किल हो सकता है। इसलिए समय रहते जागरूक होना बेहद आवश्यक है।
प्रोस्टेट कैंसर क्या है?
प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि है जो पुरुषों के मूत्राशय के नीचे और मूत्र मार्ग के चारों ओर होती है। यह ग्रंथि शुक्राणु के तरल पदार्थ का उत्पादन करती है। प्रोस्टेट कैंसर तब होता है जब इस ग्रंथि के सेल अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगते हैं। यह कैंसर आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है लेकिन कुछ मामलों में तेजी से भी फैल सकता है।
पेशाब में दिखने वाले 5 मुख्य लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर पेशाब में निम्नलिखित लक्षण दिखें तो यह प्रोस्टेट कैंसर का संकेत हो सकता है:
बार-बार पेशाब आना: खासकर रात के वक्त पेशाब की बार-बार जरूरत महसूस होना, जो सामान्य से अधिक हो।
पेशाब में जलन या दर्द: पेशाब करते वक्त जलन या तेज दर्द होना।
कमजोर या बाधित पेशाब की धारा: पेशाब की स्ट्रिम कमजोर होना या बीच में रुक जाना।
पेशाब में खून आना: रक्त की मौजूदगी किसी भी हालत में गंभीर चेतावनी है।
पेशाब करने में कठिनाई: मूत्राशय खाली करने में परेशानी या पेशाब का पूरा निकल न पाना।
डॉक्टरों की सलाह: प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर क्यों दें ध्यान?
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर अन्य सामान्य मूत्र रोगों जैसे प्रोस्टेट की सूजन (बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया) या मूत्र मार्ग में संक्रमण से मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए सही निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से समय पर जांच करवाना जरूरी है। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. बताते हैं, “अगर पुरुष अपने मूत्र से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज करते हैं तो कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। शुरुआती जांच में प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजेन (PSA) टेस्ट और डिजिटल रेक्टल परीक्षा अहम होती हैं।”
प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम और इलाज
नियमित जांच कराएं: 50 वर्ष से ऊपर के पुरुषों को सालाना प्रोस्टेट की जांच करानी चाहिए। अगर परिवार में किसी को प्रोस्टेट कैंसर रहा हो तो यह उम्र और भी कम हो सकती है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: हरी सब्जियां, फलों का सेवन बढ़ाएं और रेड मीट व अधिक तले-भुने भोजन से बचें।
व्यायाम और वजन नियंत्रण: नियमित व्यायाम करें और मोटापे से बचें।
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं: ये दोनों प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
दवा और सर्जरी के विकल्प: प्रारंभिक स्थिति में दवाओं से नियंत्रण संभव होता है, पर गंभीर मामलों में सर्जरी या रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि पेशाब में ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी के विशेषज्ञ से संपर्क करें। विशेष रूप से यदि:
पेशाब में लगातार खून आ रहा हो।
पेशाब की धारा अत्यंत कमजोर हो गई हो।
पेशाब करने में दर्द या जलन हो।
बार-बार मूत्र की तीव्रता बढ़े।
और साथ ही यदि किसी अन्य कारण से वजन घटना, कमजोरी या कमजोरी महसूस हो।
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