गर्मी के मौसम में या बीमारियों के दौरान शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या आमतौर पर वयस्कों में देखी जाती है, लेकिन यह समस्या बच्चों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई अभिभावक इस बात को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे समय पर इलाज न मिलने पर बच्चे की हालत बिगड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर तेजी से तरल पदार्थ खोता है और यदि इसकी पूर्ति न हो तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।
क्या है डिहाइड्रेशन?
डिहाइड्रेशन तब होता है जब शरीर में जितना पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की आवश्यकता होती है, उससे अधिक मात्रा में उसकी कमी हो जाए। बच्चों में यह स्थिति इसलिए गंभीर मानी जाती है क्योंकि उनका शरीर छोटा होता है और वे पसीने, दस्त या उल्टी के जरिए जल्दी पानी खो देते हैं।
बच्चों में डिहाइड्रेशन के प्रमुख कारण
गर्मी और धूप में अधिक समय बिताना
बुखार, उल्टी या दस्त होना
पानी या तरल पदार्थों का कम सेवन
तेज शारीरिक गतिविधि के बाद आराम न करना
डायबिटीज या अन्य रोगों से जुड़ी जटिलताएं
कैसे पहचानें डिहाइड्रेशन के लक्षण?
बाल रोग विशेषज्ञ, बताती हैं,
“बच्चे हमेशा अपने लक्षण शब्दों में नहीं बता पाते, इसलिए अभिभावकों को उनके व्यवहार और शारीरिक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।”
मुख्य लक्षण:
मुंह और होंठों का सूखना
पेशाब कम आना या गाढ़ा पीला रंग
चिड़चिड़ापन या सुस्ती
आंखों का धंसा हुआ दिखना
त्वचा में लचीलापन कम होना (स्किन टेस्ट)
रोते समय आंसुओं का न आना
सांस तेज़ चलना
तेज़ दिल की धड़कन
यदि इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डिहाइड्रेशन से कैसे करें बच्चों को सुरक्षित?
तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं:
बच्चों को बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाएं। नारियल पानी, ORS, छाछ, दही, नींबू पानी जैसे तरल पदार्थ काफी मददगार होते हैं।
खेलने के बाद पानी जरूर दें:
बाहर खेलने के बाद या धूप से लौटने पर बच्चों को ठंडे पानी से नहीं, सामान्य तापमान वाले पानी से तरलता दें।
फलों का सेवन कराएं:
तरबूज, खीरा, संतरा, अंगूर जैसे फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो बच्चों के शरीर में तरलता बनाए रखते हैं।
बीमारी के दौरान विशेष ध्यान दें:
यदि बच्चे को बुखार, दस्त या उल्टी है, तो तुरंत ORS देना शुरू करें और डॉक्टर से संपर्क करें।
हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं:
गर्मियों में बच्चों को ढीले और सूती कपड़े पहनाना चाहिए ताकि पसीना जल्दी सूख सके और शरीर ठंडा रहे।
विशेषज्ञों की सलाह
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है,
“डिहाइड्रेशन की स्थिति को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। बच्चों की देखभाल में छोटी-छोटी सावधानियां उन्हें इस स्थिति से सुरक्षित रख सकती हैं। अभिभावकों को विशेषकर गर्मियों में बच्चों के पानी के सेवन पर लगातार नजर रखनी चाहिए।”
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