क्या आप उन लोगों में से हैं जिन्हें हर मौसम में सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती है? क्या छींकें आना, नाक बहना, आंखों में पानी और सिर दर्द आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है? अगर हां, तो हो सकता है कि आप साधारण सर्दी-जुकाम नहीं बल्कि एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित हों — एक ऐसी बीमारी जो अक्सर अनदेखी रह जाती है, लेकिन जीवन की गुणवत्ता को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
हालांकि ज़्यादातर लोग बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम को मौसम का प्रभाव या इम्यूनिटी की कमजोरी मानते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो यह क्रॉनिक एलर्जिक कंडीशन हो सकती है, जिसे समय पर पहचानना और इलाज कराना बेहद ज़रूरी है।
क्या होता है एलर्जिक राइनाइटिस?
एलर्जिक राइनाइटिस एक प्रकार की एलर्जी है, जो जब व्यक्ति किसी विशेष एलर्जन (जैसे धूल, परागकण, जानवरों की रूसी, फंगस आदि) के संपर्क में आता है, तब होती है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की अत्यधिक प्रतिक्रिया है, जो आमतौर पर हानिरहित चीज़ों को भी खतरे के रूप में पहचानने लगती है।
विशेषज्ञ इसे दो भागों में बांटते हैं:
सीजनल एलर्जिक राइनाइटिस: जो खासतौर पर मौसम बदलने पर होता है।
परिनियल (Perennial) एलर्जिक राइनाइटिस: जो सालभर बना रहता है।
लगातार सर्दी-जुकाम: एलर्जिक राइनाइटिस के प्रमुख लक्षण
बार-बार छींक आना (खासकर सुबह)
नाक का लगातार बहना या बंद होना
आंखों में खुजली या पानी आना
गले में खराश या खांसी
सिर में भारीपन और थकान
नींद में खलल और चिड़चिड़ापन
जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं
वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. के अनुसार:
“जब मरीज हर महीने सर्दी-जुकाम, छींक और आंखों में खुजली की शिकायत लेकर आते हैं, तो हम सिर्फ वायरल इंफेक्शन नहीं, एलर्जिक राइनाइटिस की जांच भी करते हैं। ये बीमारी आम है लेकिन लोग इसे हल्के में ले लेते हैं, जिससे यह धीरे-धीरे अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।”
कैसे होता है निदान?
एलर्जिक राइनाइटिस का निदान मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर किया जाता है। हालांकि कुछ मामलों में डॉक्टर एलर्जन टेस्ट या ब्लड टेस्ट (IgE) भी सुझा सकते हैं। इनसे यह पता लगाया जा सकता है कि किस चीज से एलर्जी हो रही है।
बचाव और इलाज के 5 अहम उपाय
1. एलर्जन से दूरी बनाएं
अपने घर और कार्यस्थल को धूल-मिट्टी से मुक्त रखें। बिस्तर, परदे और गद्दों को नियमित रूप से साफ करें।
2. नाक धोने की आदत डालें
दिन में दो बार नमक मिले गुनगुने पानी से नाक धोना (नेटी पॉट या सलाइन स्प्रे से) लाभकारी होता है।
3. मौसम और प्रदूषण से बचाव करें
बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर जब प्रदूषण या परागकण की मात्रा अधिक हो।
4. डॉक्टरी परामर्श से दवा लें
एंटीहिस्टामाइन, नेज़ल स्प्रे और इनहेलेबल दवाएं डॉक्टर की सलाह से लें। खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है।
5. इम्यूनोथेरेपी का विकल्प
कुछ मामलों में जब सामान्य दवाएं असर नहीं करतीं, तो एलर्जी के लिए इम्यूनोथेरेपी दी जाती है, जिसमें शरीर को धीरे-धीरे एलर्जन के प्रति सहनशील बनाया जाता है।
बच्चों और बुजुर्गों में विशेष सावधानी
एलर्जिक राइनाइटिस बच्चों और बुजुर्गों में अधिक प्रभावी हो सकता है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। बच्चों में यह ध्यान भंग, पढ़ाई में रुचि की कमी और बार-बार की खांसी का कारण बन सकता है।
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