कभी आपने गौर किया है कि बात-बात पर गुस्सा करना सिर्फ रिश्तों में दरार ही नहीं लाता, बल्कि यह दिल की सेहत के लिए भी एक गंभीर खतरा बन सकता है? हाल ही में कई मेडिकल रिसर्च और कार्डियोलॉजिस्ट्स की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि अत्यधिक क्रोध या तनाव की स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
दिल की बीमारी अब केवल उम्रदराज़ लोगों की समस्या नहीं रही, बल्कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुस्सा और चिड़चिड़ापन सिर्फ मानसिक समस्या नहीं, बल्कि यह शरीर के अंदर कई खतरनाक प्रतिक्रियाओं को जन्म देता है, जो सीधे हृदय पर असर डालती हैं।
गुस्से का शरीर पर क्या असर पड़ता है?
दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय मलिक बताते हैं:
“जब कोई व्यक्ति बहुत गुस्से में होता है, तो उसके शरीर में एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इससे हृदयगति बढ़ती है, ब्लड प्रेशर अचानक ऊपर जाता है और धमनियों में खिंचाव आता है। अगर कोई पहले से हृदय रोग से पीड़ित है, तो इस स्थिति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बहुत अधिक होता है।”
इसके अलावा, गुस्से के दौरान रक्त में थक्का बनने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे दिल की धमनियों में अवरोध उत्पन्न हो सकता है।
रिसर्च क्या कहती है?
‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक,
“जो लोग नियमित रूप से अत्यधिक क्रोध या तनाव की स्थिति में रहते हैं, उनमें सामान्य व्यक्तियों की तुलना में अगले दो घंटों में हार्ट अटैक की संभावना दोगुनी पाई गई है।”
गुस्सा केवल क्षणिक प्रतिक्रिया नहीं है, यह शरीर की पूरी हार्मोनल प्रणाली को असंतुलित करता है। इस वजह से हृदय की धड़कन अनियमित हो सकती है, जो कार्डियक अरेस्ट तक पहुंचा सकती है।
कौन हैं हाई रिस्क ग्रुप में?
उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग
डायबिटीज़ रोगी
धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले
मोटापा या थायरॉइड जैसी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति
पहले से हृदय रोग की पारिवारिक इतिहास वाले लोग
अत्यधिक तनावपूर्ण कार्यस्थल या पारिवारिक माहौल में रहने वाले
एक्सपर्ट्स से जानिए – कैसे बचें गुस्से की गिरफ्त से?
1. गहरी सांस लें और प्रतिक्रिया से पहले सोचें
क्रोध आने पर कुछ पल शांत बैठें, गहरी सांस लें और तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचें।
2. नियमित योग और ध्यान करें
योग और प्राणायाम से मानसिक संतुलन बनता है और हार्मोनल उतार-चढ़ाव नियंत्रित रहता है।
3. सोशल सपोर्ट बनाए रखें
परिवार या दोस्तों से अपनी भावनाएं साझा करें। भावनाओं को दबाना भी खतरनाक हो सकता है।
4. सोने और खाने का नियमित समय रखें
नींद की कमी और असंतुलित आहार मानसिक संतुलन बिगाड़ सकते हैं, जिससे गुस्सा और तनाव बढ़ते हैं।
5. पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें
यदि आपको लगता है कि आपका गुस्सा नियंत्रित नहीं हो पा रहा, तो साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर से सलाह लें।
गुस्सा नहीं, दिल की सुनें
गुस्सा आना इंसानी स्वभाव का हिस्सा है, लेकिन इसे नियंत्रित करना ही असली समझदारी है। बिना वजह की बहस, झुंझलाहट और चिड़चिड़ापन सिर्फ दूसरों को नहीं, खुद को भी नुकसान पहुंचाता है। अपने दिल का ख्याल रखना है तो मानसिक शांति और संयम बनाए रखना जरूरी है।
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