छींक आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिससे शरीर अपने अंदर मौजूद प्रदूषकों और एलर्जी पैदा करने वाले कणों को बाहर निकालता है। लेकिन क्या आपने कभी छींक को दबाने की कोशिश की है? हो सकता है आपको लगे कि यह कोई मामूली बात है, पर डॉक्टरों की चेतावनी के अनुसार छींक को दबाना सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
छींक को दबाना: एक आम आदत, लेकिन खतरे से खाली नहीं
छींक आना शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया का हिस्सा है, जो नाक, गले और श्वसन तंत्र में फंसे हुए कणों को बाहर निकालता है। हालांकि कई लोग इसे सार्वजनिक स्थानों या हड़बड़ी में दबाने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छींक को दबाना सिर्फ असहजता पैदा नहीं करता, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म भी दे सकता है।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
ईएनटी विशेषज्ञ, बताते हैं, “छींक दबाने से नाक में दबाव बढ़ता है जो खून की नलियों, कान, और गले तक प्रभावित कर सकता है। इससे नाक की नसों को नुकसान पहुंच सकता है और गंभीर मामलों में कान में दर्द, कान से खून बहना या कान का संक्रमण भी हो सकता है।”
छींक दबाने से हो सकते हैं ये गंभीर खतरे
नाक की रक्त वाहिकाओं को नुकसान: छींक दबाने पर नाक के अंदर दबाव बढ़ जाता है, जिससे रक्त वाहिकाओं में फटना या नाक से खून बहने का खतरा रहता है।
कान की समस्याएं: नाक और कान के बीच एक छोटा रास्ता होता है जिसे ईustachian ट्यूब कहा जाता है। छींक दबाने से इस पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे कान में संक्रमण, दर्द या सुनने की समस्या हो सकती है।
फेफड़ों पर असर: अचानक दबाव बढ़ने से फेफड़ों में भी समस्या आ सकती है, जो खासकर उन लोगों के लिए खतरनाक है जिनके फेफड़ों में पहले से ही कोई रोग हो।
मस्तिष्क पर प्रभाव: कुछ दुर्लभ मामलों में, छींक दबाने से मस्तिष्क की नसों पर भी दबाव पड़ सकता है, जिससे सिर दर्द या गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
सही तरीका क्या है?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि छींक को खुलकर और स्वच्छ तरीके से निकालना चाहिए। इसे दबाने के बजाय हमेशा एक टिशू या कपड़े का इस्तेमाल करें और मुंह व नाक को पूरी तरह खोलकर छींकें। इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता है। यदि सार्वजनिक स्थान हो तो कोहनी के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल करें ताकि छींक के दौरान निकलने वाले कण दूसरों को न लगें।
छींक आने पर क्या करें?
छींक आने पर घबराएं नहीं।
एक साफ टिशू या रूमाल लेकर नाक और मुंह ढकें।
छींक पूरी तरह बाहर निकालें, दबाने की कोशिश न करें।
छींक के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
छींक से जुड़ी मिथक और सच
बहुत से लोग मानते हैं कि छींक दबाना सुरक्षित है या यह कोई बड़ा मसला नहीं। लेकिन मेडिकल साइंस ने इसे खतरनाक बताया है। वहीं, छींक आने पर बाहर खुलकर छींकना भी साफ-सफाई का सवाल है। सही तरीका अपनाकर हम अपनी और दूसरों की सेहत का ध्यान रख सकते हैं।
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