मैं इस्लामी या ईसाई इतिहास पर फिल्में नहीं बनाता: विवेक अग्निहोत्री का स्पष्टीकरण

फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने हाल ही में एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। उनके हालिया बयान ने यह सवाल उठाया कि क्या वे खुद को हिंदुओं की आवाज़ समझते हैं। मीडिया से बातचीत में अग्निहोत्री ने इस विषय पर स्पष्टता देते हुए बताया कि वे इस्लामी या ईसाई इतिहास पर फिल्में क्यों नहीं बनाते और हिंदू इतिहास पर फोकस क्यों रखते हैं।

फिल्मों का चुनाव और सामाजिक दृष्टिकोण

विवेक अग्निहोत्री अपने इतिहास आधारित और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि भारतीय सिनेमा में हिंदू इतिहास और संस्कृति को सही ढंग से प्रस्तुत करने की कमी रही है। इसी वजह से वे हिंदू इतिहास पर केंद्रित फिल्में बनाते हैं। उन्होंने कहा, “मैं इस्लामी या ईसाई इतिहास पर फिल्में इसलिए नहीं बनाता क्योंकि मैं उन्हें बेहतर तरीके से पेश करने में सक्षम नहीं हूं। मुझे लगता है कि हमें अपने हिंदू इतिहास को ही उजागर करना चाहिए।”

उनके इस बयान ने विभिन्न तबकों में बहस को जन्म दिया है। जहां कुछ लोग उन्हें सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक मानते हैं, वहीं कुछ आलोचक इसे विभाजनकारी भी करार देते हैं।

क्या खुद को मानते हैं हिंदुओं की आवाज?

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे खुद को हिंदुओं की आवाज मानते हैं, तो विवेक अग्निहोत्री ने जवाब दिया, “मैं किसी की आवाज़ नहीं हूं, मैं एक फिल्म निर्माता हूं। मेरा काम कहानियां बताना है। अगर मेरी फिल्मों से हिंदू इतिहास को सही मान-सम्मान मिलता है तो यह खुशी की बात है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी समुदाय के खिलाफ या पक्ष में जाकर विवाद पैदा करना नहीं है, बल्कि इतिहास को सही और सटीक रूप में प्रस्तुत करना है। “मेरी फिल्मों का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि बांटना,” उन्होंने कहा।

विवेक अग्निहोत्री और विवाद

विवेक अग्निहोत्री की फिल्मों और बयानों को लेकर अक्सर तीखी प्रतिक्रियाएं आती रही हैं। उनकी पिछली फिल्मों ने सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों को लेकर गहरी बहस को जन्म दिया था। वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं और अपने विचारों को खुलेआम रखते हैं।

उनकी फिल्मों को कुछ लोग समाज की भावनाओं की रक्षा करने वाला नजरिया मानते हैं, तो कुछ इसे एकतरफा और विवादास्पद भी कहते हैं। यह उनके काम और व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुका है।

फिल्म और समाज के बीच संतुलन

सिनेमा की भूमिका सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह समाज की सोच और मान्यताओं को प्रभावित भी करता है। ऐसे में जब कोई फिल्म निर्माता खास तौर पर एक समुदाय के इतिहास पर फोकस करता है, तो यह स्वाभाविक है कि सवाल उठेंगे।

अग्निहोत्री के इस बयान से यह साफ है कि वे अपने दृष्टिकोण पर कायम हैं और अपनी कला के माध्यम से वे भारतीय संस्कृति और इतिहास की एक विशिष्ट तस्वीर पेश करना चाहते हैं।

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