महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज (सफेद रंग का स्राव) आना एक आम समस्या है, जिसके बारे में कई बार अनजान या गलतफहमी रहती है। कई महिलाएं इसे बीमारी समझकर घबरा जाती हैं, तो कुछ इसे सामान्य मान कर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन क्या वास्तव में यह किसी बीमारी का संकेत है? इस सवाल का जवाब विशेषज्ञ डॉक्टरों से जानना बेहद जरूरी है।
व्हाइट डिस्चार्ज क्या होता है?
व्हाइट डिस्चार्ज, जिसे मेडिकल भाषा में लेवोर्गिनिया कहा जाता है, महिलाओं के योनि से निकलने वाला सफेद या दूधिया रंग का स्राव होता है। यह महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम की एक सामान्य प्रक्रिया है, जो खासतौर पर हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। आमतौर पर, यह डिस्चार्ज सफेद या हल्का पीला रंग का होता है और इसका स्वरूप महीनों में बदलता रहता है।
व्हाइट डिस्चार्ज के सामान्य कारण
हार्मोनल बदलाव, खासकर मासिक धर्म चक्र के दौरान
ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन) के समय
गर्भावस्था के दौरान
सेक्सुअल एक्साइटमेंट या तनाव के कारण
योनि की स्वच्छता में बदलाव या असामान्य हाइजीन प्रैक्टिस
व्हाइट डिस्चार्ज की बीमारी की निशानियां
डॉक्टरों के अनुसार, हर तरह का डिस्चार्ज समस्या नहीं है, लेकिन यदि इसमें कुछ असामान्य लक्षण दिखें तो यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। इनमें प्रमुख हैं:
डिस्चार्ज का रंग पीला, हरा या ग्रे हो जाना
बदबूदार गंध आना
खुजली या जलन महसूस होना
पेन या दर्द होना
पेशाब के समय जलन या अन्य असुविधा
योनि में सूजन या लालिमा दिखना
ऐसे लक्षण पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है क्योंकि ये फंगल, बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण का संकेत हो सकते हैं।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
गायनेकोलॉजिस्ट बताती हैं,
“व्हाइट डिस्चार्ज का होना हर महिला के लिए सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यह ज्यादा हो जाए, रंग में बदलाव आए या गंध के साथ खुजली जैसी समस्या हो तो यह संक्रमण या बीमारी का संकेत हो सकता है। सबसे आम कारण हैं – कैन्डिडा (फंगल संक्रमण), बैक्टीरियल वेजिनोसिस, या यौन संचारित रोग। सही जांच और उपचार जरूरी है।”
व्हाइट डिस्चार्ज के बचाव और इलाज के उपाय
स्वच्छता का ध्यान रखें:
योनि की सफाई के लिए केवल साफ पानी का प्रयोग करें, कठोर साबुन या केमिकल युक्त उत्पादों से बचें।
खासतौर पर कपड़े सूखे और साफ रखें:
नमी में योनि की सूक्ष्मजीव बढ़ सकते हैं, इसलिए सूती और साफ कपड़े पहनें।
संतुलित आहार लें:
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार आवश्यक है।
डॉक्टर की सलाह लें:
कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो घरेलू उपाय करने की बजाय विशेषज्ञ से संपर्क करें।
सही दवाइयां और इलाज:
इंफेक्शन के अनुसार डॉक्टर दवाइयां देते हैं, फंगल संक्रमण के लिए एंटिफंगल, बैक्टीरियल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक आदि।
यह भी पढ़ें:
फौलादी शरीर के लिए क्या है बेहतर? भीगे हुए चने या अंकुरित चने – जानें वैज्ञानिक आधार पर सही विकल्प
Business Sandesh Indian Newspaper | Articles | Opinion Pieces | Research Studies | Findings & News | Sandesh News