जोड़ों का दर्द बन सकता है बड़ी बीमारी का संकेत, जानिए एक्सपर्ट की राय

जोड़ों में दर्द आमतौर पर उम्र बढ़ने, अधिक चलने या मौसम के बदलाव के कारण माना जाता है, लेकिन कई बार यह लक्षण किसी गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकता है। विशेष रूप से जब यह दर्द लगातार बना रहे, सुबह उठने पर जोड़ों में जकड़न महसूस हो या सूजन दिखाई दे, तो इसे नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है।

रुमेटोलॉजिस्ट का कहना है कि जोड़ों का लगातार बना रहने वाला दर्द केवल ‘ऑर्थराइटिस’ (गठिया) तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह ऑटोइम्यून डिज़ीज, इन्फेक्शन, या डिजेनेरेटिव डिसऑर्डर जैसी गंभीर स्थितियों का लक्षण भी हो सकता है।

कब हो सकता है जोड़ों का दर्द गंभीर?

डॉ. बताती हैं कि अगर किसी व्यक्ति को निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

जोड़ों में लंबे समय तक लगातार दर्द रहना

सुबह उठने पर 30 मिनट से अधिक समय तक जोड़ों की जकड़न

सूजन और लालिमा

जोड़ों का गर्म महसूस होना

हल्का बुखार या थकान के साथ दर्द होना

छोटे जोड़ों (जैसे हाथ-पैर की उंगलियों) में दर्द की शुरुआत

कौन-सी गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है?

रुमेटॉइड आर्थराइटिस (RA):
एक ऑटोइम्यून बीमारी जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। शुरुआती पहचान और इलाज से नुकसान को रोका जा सकता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस:
उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों का घिस जाना। यह सबसे सामान्य कारण है लेकिन समय पर प्रबंधन जरूरी है।

लुपस (SLE):
यह भी एक ऑटोइम्यून रोग है जिसमें जोड़ों के साथ-साथ त्वचा, किडनी और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।

गाउट:
यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में तेज दर्द और सूजन होता है, खासकर पैरों के अंगूठे में।

संक्रमण (Septic Arthritis):
किसी बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण जोड़ों में सूजन और दर्द हो सकता है, जो जल्दी इलाज न होने पर गंभीर रूप ले सकता है।

क्या करें अगर जोड़ों में दर्द लगातार बना रहे?

खुद से दर्द निवारक दवाएं लेने से बचें

विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें, विशेष रूप से रुमेटोलॉजिस्ट से

ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या एमआरआई जैसी जांच कराएं

हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज़ और वजन नियंत्रित रखें

पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाएं

एक्सपर्ट की सलाह

“कई बार लोग सालों तक जोड़ों के दर्द को हल्के में लेते हैं और जब तक बीमारी गंभीर रूप लेती है, तब तक हड्डियों या अंगों में स्थायी नुकसान हो चुका होता है। शुरुआती निदान और इलाज से हम बहुत कुछ बचा सकते हैं।”

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