कुत्ते के काटने की घटनाएं खासकर बच्चों और ग्रामीण इलाकों में आम हैं। अक्सर इस तरह की चोटों को मामूली समझकर घरेलू उपचार या देरी से चिकित्सा सहायता लेने की गलती हो जाती है, जो गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद सही इलाज और समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप बेहद जरूरी होता है, अन्यथा यह संक्रमण और रैबीज जैसे जानलेवा रोगों का कारण बन सकता है।
गलत इलाज और घरेलू नुस्खों का खतरा
कई बार लोगों को कुत्ते के काटने के बाद घाव को घर पर ही नीम के पत्ते, हल्दी, दही या किसी अन्य घरेलू सामग्री से लगाने की सलाह दी जाती है। हालांकि ये उपाय संक्रमण को रोकने में प्रभावी नहीं होते और असल समस्या को बढ़ा सकते हैं। घाव को ठीक से साफ न करने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जिससे घाव सड़ सकता है और तेज दर्द, सूजन या बुखार हो सकता है।
देरी से इलाज क्यों होता है जानलेवा?
रैबीज का खतरा: कुत्ते के काटने में रैबीज वायरस होने का खतरा हमेशा बना रहता है। रैबीज एक वायरल संक्रमण है जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और इसके लक्षण दिखने तक मृत्यु की संभावना होती है। सही समय पर एंटी-रैबीज टीका लगवाना बेहद आवश्यक होता है।
इन्फेक्शन का फैलाव: घाव में संक्रमण होने से यह शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है। यह सेप्सिस (संक्रमण के कारण रक्त में जीवाणु का फैलाव) की स्थिति तक पहुंच सकता है, जो जानलेवा हो सकती है।
गलत नशा और दवाइयां: बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाई लेना या अनियमित तरीके से दवा लेना संक्रमण को बढ़ावा देता है।
एक्सपर्ट की सलाह: कुत्ते के काटने पर क्या करें?
फौरन घाव साफ करें: साबुन और साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक घाव को अच्छी तरह धोएं।
खून निकलने दें: खून निकलने से घाव से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं।
डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें: रैबीज टीकाकरण और घाव की सही देखभाल के लिए चिकित्सक से सलाह लें।
टीकाकरण समय पर कराएं: रैबीज के अलावा टिटनेस का टीका भी जरूरी होता है।
घाव पर घरेलू नुस्खे न लगाएं: इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
घाव को साफ और सूखा रखें: पट्टी या बैंडेज लगाने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
रैबीज से बचाव के लिए जरूरी कदम
कुत्तों को नियमित रूप से वैक्सीनेट करवाएं।
अनजान या आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखें।
बच्चों को कुत्तों के साथ खेलने के दौरान सतर्क रहने की शिक्षा दें।
यदि कोई जानवर असामान्य व्यवहार दिखाए तो तुरंत स्थानीय पशु नियंत्रण विभाग को सूचित करें।
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