भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमता ने एक नया मुकाम छुआ है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने वित्त वर्ष 2024‑25 में “Made‑in‑India” iPhones की अमेरिका को हुई शिपमेंट से लगभग ₹23,112 करोड़ की कमाई दर्ज की है। यह राशि कंपनी की कुल आय का करीब 37 प्रतिशत है।
यह आंकड़ा केवल टाटा के लिए ही नहीं, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र के लिए भी बड़ी सफलता है। गौरतलब है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने मार्च 2024 में विस्ट्रॉन की इकाई (Wistron facility) अधिग्रहित की थी, जिससे उत्पादन क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हुई।इसके अतिरिक्त, जनवरी 2025 में टाटा ने पेगाट्रॉन टेक्नोलॉजी इंडिया (Pegatron India) में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद कर इस उद्योग में अपनी पकड़ और मजबूत की।
पृष्ठभूमि और रणनीति:
पहले चीन से iPhones की अधिकांश शिपमेंट होती थी, लेकिन बदलती वैश्विक व्यापार नीति, विशेषकर अमेरिका‑चीन ट्रेड टकराव, ने Apple को निर्माण भागीदारी को भारत की ओर मोड़ने के लिए प्रेरित किया। अमेरिका में चीन से आने पर भारी टैरिफ की आशंका और व्यापार बाधाओं ने इस बदलाव को आवश्यक बना दिया है।
भारत में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की उत्पादन इकाइयों ने भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में स्थापित किया है। Narsapura, Karnataka में विस्ट्रॉन की इकाई अधिग्रहण और तमिलनाडु में पेगाट्रॉन की इकाई के नियंत्रण में आने ने इस क्षमता को और बढ़ाया है।
वित्तीय प्रभाव:
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के वित्तीय दस्तावेज बताते हैं कि FY25 में कंपनी की कुल राजस्व ₹75,367 करोड़ रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में पाँच गुना से भी अधिक है। इसी अवधि में शुद्ध लाभ भी ₹2,339 करोड़ पर पहुंचा, जबकि पहले यह राशि बहुत कम थी।
शंघाई का नजरिया कहां से जुड़ता है:
“शंघाई देखता रह गया” की व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति इस तथ्य को बयाँ करती है कि चीन, विशेष रूप से ताइवान‑आधारित या चीनी कंपनी जो ऐप्पल की उत्पादन श्रृंखला में शामिल थीं, अब भारत की तेज़ी से बढ़ती उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धा को निहार रही हैं। भारत चीन से iPhone निर्माण तथा निर्यात को आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है।
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