बिहार की राजधानी पटना में ‘भोजपुरी के शेक्सपियर’ के नाम से मशहूर प्रसिद्ध लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की 136 वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
नाटककार, अभिनेता, लोक गायक और समाज सुधारक ठाकुर का जन्म 18 दिसम्बर, 1887 को बिहार के सारण जिला में हुआ था। सन् 1971 में उनका निधन हो गया।
कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री जितेंद्र कुमार राय ने सोमवार की शाम कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘यह मेरे लिए गर्व कि बात है कि मैं भिखारी ठाकुर के गृह जिले से हूँ। अपने समय में ही भिखारी ठाकुर जी ने स्वस्थ और समतामूलक समाज का निर्माण कैसे हो, इसपर केंद्रित नाटक और गीत रचे थे। उनके द्वारा रचे गए नाटक और गीत आज के सन्दर्भ में भी प्रासंगिक हैं जो उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।’
उन्होंने कहा कि बिहार की जो सांस्कृतिक पहचान रही है उसे आगे बढ़ाने में कलाकरों की भूमिका महत्वपूर्ण है और बिहार सरकार कलाकरों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा विभिन्न विधाओं के विद्वानों पर कार्य किया जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव हरजोत कौर बम्हरा ने कहा, ‘भिखारी ठाकुर जी ने सामाजिक कुरीतियों पर कई नाटक एवं गीत लिखे हैं। उन्होंने नाटक भी ऐसे रचे हैं, जो आम लोगों के लिए सहज, सरल सीधी भाषा में हैं। उनके नाटकों ने लोगों की मानसिकता को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंनें स्त्रियों के मन, उनके भाव, वियोग और उनकी व्यथाओं का चित्रण बहुत ही सुन्दर और सहज ढंग से किया था।’
कौर ने कहा कि इस अवसर पर भिखारी ठाकुर जी के शिष्य एवं उनके साथ काम कर चुके लखिचन्द माँझी जी को नाच कला में जीवनपर्यंत उत्कृष्ट योगदान के लिए कला संस्कृति एवं युवा विभाग (बिहार सरकार) द्वारा ‘बिहार कला पुरस्कार’ के तहत ‘लाइफ टाइम एचीवमेंट’ पुरस्कार (प्रदर्शन कला) से सम्मानित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान लखिचन्द माँझी को बिहार कला सम्मान के तहत एक लाख रुपये की राशि एवं प्रतिक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने भिखारी ठाकुर रचित सोहर गाया।
इस अवसर पर ठाकुर द्वारा महिला सशक्तिकरण पर लिखे गये एक संगीत नाटक का भी मंचन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान “नई पीढ़ी और भिखारी ठाकुर” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
तिगोला सांगितिक प्रस्तुति विश्व प्रसिद्ध गायिका कल्पना पटवारी, पद्मश्री रामचंद्र माँझी की शिष्या प्रसिद्ध लोकगायिका सरिता साज़ एवं भोजपुरी विरासत के ठेंठ गायक रामेश्वर गोप द्वारा की गयी।
इस अवसर पर भिखारी ठाकुर कृत गबरघिचोर नाटक का मंचन डॉ. जैनेन्द्र दोस्त के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘भिखारी द किंग’ नामक परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार ने किया।
– एजेंसी
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